Sunday, March 1, 2009

दो औरतें

इन दो औरतों को छोड़कर सब लोग कमरे से निकल गए हैं । पहली औरत ने दुसरी को देखा , और पहले दो मिनटों में वह कुछ नहीं कह पाई । अगर उसने दुसरी से एक शब्द ही कहा , तो वह रोती हो । लेकिन यह महिला काफ़ी रो चुकी है , तो उसने अंत में पूछा : "आपने मेरे पति को अच्छी तरह जाना, न ?" दुसरी औरत ने उसे देखकर कहा , "जी हाँ ।" पहली औरत ने पूछा : "और आपको मालूम भी है कि हमारे दो बेटे हैं ?" इस समय दुसरी औरत उसे नहीं देख सकी । तब उसने जवाब दिया : "मैं सिर्फ़ बाद में समझ गई ।" वह बैठ गई और उसने अगले सवाल के इंतज़ार किया । " लेकिन आप उससे मिलते रहीं , हालाँकि वह शादी-शुदा था और उसके बेटे थे ?" दुसरी औरत ने कुछ नहीं कहा । विधवा ने अपने कोट से एक लिफ़ाफ़ा निकालकर अपने पति की प्रेमिका को यह थमाया । "मैं सोचती हूँ कि मेरे पति ने यह आपके लिए लिखा था , मैंने उसके सोने के कमरे में यह पाया । क्या यह आपका नाम है ?" जवान औरत ने लिफ़ाफ़ा ले लिया और उसकी आँखें लाल हो गईं । "अपने आँसू मुझे न दिखाओ ; मैंने आपके कारण बहुत आँसू बहाए , जो आँसू आपने कभी नहीं देखे हैं ।" विधवा कहकर निकल गई , लेकिन जवान औरत ने उसको नहीं सुना ; वह लिफ़ाफ़ा नहीं खोल पाई , सिर्फ़ वह यह छू रही थी और सोच रही थी , और धीरे-धीरे आँसू निकल आए ।

No comments:

Post a Comment