Sunday, September 20, 2009
धोने के लिए नदी के पास
जबसे मैं भारत से वापस आया तबसे मैंने इस देश के बारे में बहुत नहीं सोचा है । लेकिन उस दिन जब मैं हिन्दुसतानी संगीत सुन रहा था , मैं उन छह हफ़तों की याद होने लगा । पहली याद कुछ धोबियों के बारे में थी । उस दिन मैं अकेला था , पैदल चल रहा था । मुझे बहुत गर्मी लग रही थी क्योंकी जून का शुरू था और मैं एक लकनउ की सड़क पर था । मैंने शाहर की नदी देखी , जिसका नाम गोमती है । मुझ और गोमती के बीच एक कुछ बड़ा हरा खेत था , जहाँ बहुत कपड़े और साड़ियाँ लटके हुईं । बहुत-से रंग थे : लाल , साफ़ेद , नारंगी , पीला , ज़िनदगी के सब रंग । और उन सब रंगों के बीच एक धोबी का परीवार था । वे साथ-साथ काम कर रहे थे । शरू में हमारी दूरी मुझे उनके चेहरे देखने नहीं दिया । तब मैंने अपना कैमरा निकाला , जिसका पास एक शक्तिशाली लेंस है , और कैमरे से मैं उन धोबियों के चेहरे देख सका । मैंने संसार में सबसे सुन्दर और असली हँसियाँ देखीं । कुछ मिनट बाद में , जब उन्होंने देखा कि मैं उन्हें फ़ोटो खींच रहा था , उनकी हँसियाँ ज़्यादा बड़ी हुईं । वे बात करने लगे । जैसे मैं उनके बारे में जिज्ञासू था वैसे वे मेरे बारे में जिज्ञासू थे । मैंने वह हँसी और जिज्ञासा पहचानी : गरीबी की निष्कपटता । वह मैंने गरीब लोगों में ही बहुत बार देखा हूँ । लोग जिनके पास ज़्यादा पैसा है उनकी यह सच्ची हँसी कभी नहीं है । गरीब लोगों को बहुत दुःख सहना पड़ता है , लेकिन उनके चेहरों में आप ज़्यादा ख़ूशी देख सकते हैं । वह संगीत जो मैं सुन रहा हूँ मुझे हिन्दुसतानी गरीब लोगों के दुःख और ख़ूशी की याद दिलाई ।
Monday, April 6, 2009
जूते के बिना
कल मुझसे कहा गया कि दिल्ली में बहुत-से ग़रीब लोगों के पास जूते नहीं हैं । मुझे बहुत आश्चर्य हुआ । जब मैं लोगों के बारे में सोचता हूँ जिन के पास जूते नहीं हैं तब मैं अफ़्रीकी गंव कल्पना करता हूँ , लेकिन एक दुन्या सब से बहुत बड़े अर्थशास्त्र के राजधानी में नहीं । डेढ़ साल पहले मैं काफ़ी-से चीनी गंवों में सफ़र कर रहा था , और मैंने कभी लोगों को देखा जिन ही के पास जूते नहीं थे (कुछ बच्चों को छोड़कर , जो जूते पहनना नहीं चाहते थे) । शायद आप पूछ रहे हों कि जूते पहनना क्यों अहम हैं । मेरे लिए जूते प्रतीक हैं । बहुत भारती कहते हैं कि अपना देश चीन से ज़्यादा शक्तिशाली होगा , कि वह दुन्या की अगली अतिशक्ति होगा । लेकिन ये लोग ज़्यादा ग़रीब नहीं हैं , या वे आम लोगों की ज़िन्दगियाँ नहीं समझना चाहते हैं । अभी भारत में बहुत लोगों के पास जूते नहीं , और उनके पास अच्छी तबियत भी नहीं , घर भी नहीं , काफ़ी शिक्षित भी नहीं । बहुत बच्चे मर जाते हैं , कुछ अफ़्रीकी देशों में से ज्यादा । लेकिन मैंने कभी भारत में सफ़र नहीं किया है , तो मुझे आशा है कि जब मैं यह बड़ा देश जाऊँगा तब मैं बेहतर समझऊँगा । शायद मई को ! शायद तब मैं देखना सकूँगा कि कितने लोगों के पास जूते नहीं होंगे ।
Sunday, March 8, 2009
हिन्दुस्तानी फ़िल्म
शुक्रवार रात को मैंने एक हिन्दुस्तानी फ़िल्म देखी । वह बॉलीवूड की फ़िल्म नहीं है । उसका नाम "वाटर" है (भारत में उसका नाम "१९४७" है) । जब मैंने पहली बार उसका "ट्रेलर" देखा , तब मैं गंभीर फ़िल्म देखने तैयार नहीं था । लेकिन शुक्रवार रात को मैंने कुछ हिन्दी सुनना चाहा , और मैं भूला कि वह एक गंभीर फ़िल्म थी । उसकी कहानी बहुत उदास है , लेकिन हिन्दुसतान के विभाजन की कहानियाँ सब बहुत उदास हैं । जब दोस्त धार्मिक कारण के लिए अपने दोस्तों को मार डालते हैं , तब दुनिया में कम आशा है । बाद में मैं एक छोटी मिठाई बनाकर फ़्लम के बारे में ज़्यादा सोचकर सो गया । लेकिन जब से मैंने यह फ़िल्म देखी, तब से मैं भारत के बारे में ज़्यादा सोच रहा हूँ । मैं इस देश के बारे में बहुत नहीं जानता हूँ , मैं कभी उसके बहुत-सारे लोगों के बारे में नहीं जानता हूँ । ज़रूर मैं कुछ हिन्दुस्तानी खाना जानता हूँ , (और आजकल मैं बहुत हिन्दुसतानी खाना बनाता हूँ) , औार मैं कुछ अम्रीकानी-हिन्दुस्तानियों से मिला हूँ । लेकिन मैं कभी भारत नहीं गया हूँ । देश के लोग , खाना , और संस्कृति समझने हमें वहाँ जाना हैं । शायद मैं मई यह सचमुच दिलचस्प देश जा सकूँगा ।
Sunday, March 1, 2009
दो औरतें
इन दो औरतों को छोड़कर सब लोग कमरे से निकल गए हैं । पहली औरत ने दुसरी को देखा , और पहले दो मिनटों में वह कुछ नहीं कह पाई । अगर उसने दुसरी से एक शब्द ही कहा , तो वह रोती हो । लेकिन यह महिला काफ़ी रो चुकी है , तो उसने अंत में पूछा : "आपने मेरे पति को अच्छी तरह जाना, न ?" दुसरी औरत ने उसे देखकर कहा , "जी हाँ ।" पहली औरत ने पूछा : "और आपको मालूम भी है कि हमारे दो बेटे हैं ?" इस समय दुसरी औरत उसे नहीं देख सकी । तब उसने जवाब दिया : "मैं सिर्फ़ बाद में समझ गई ।" वह बैठ गई और उसने अगले सवाल के इंतज़ार किया । " लेकिन आप उससे मिलते रहीं , हालाँकि वह शादी-शुदा था और उसके बेटे थे ?" दुसरी औरत ने कुछ नहीं कहा । विधवा ने अपने कोट से एक लिफ़ाफ़ा निकालकर अपने पति की प्रेमिका को यह थमाया । "मैं सोचती हूँ कि मेरे पति ने यह आपके लिए लिखा था , मैंने उसके सोने के कमरे में यह पाया । क्या यह आपका नाम है ?" जवान औरत ने लिफ़ाफ़ा ले लिया और उसकी आँखें लाल हो गईं । "अपने आँसू मुझे न दिखाओ ; मैंने आपके कारण बहुत आँसू बहाए , जो आँसू आपने कभी नहीं देखे हैं ।" विधवा कहकर निकल गई , लेकिन जवान औरत ने उसको नहीं सुना ; वह लिफ़ाफ़ा नहीं खोल पाई , सिर्फ़ वह यह छू रही थी और सोच रही थी , और धीरे-धीरे आँसू निकल आए ।
Sunday, February 22, 2009
एक दिन न्यू योर्क में
मैं शनिवार न्यू योर्क गया , सिर्फ़ एक दिन के लिए । मेरी न्यू-योर्क-वाली ट्रेन न्यू हेवन चली दस बजने में तीन मिनट पर । वह सारी गंव में रुककर "हार्लम" पहूँची ग्यारह बजकर सत्रह मिनट पर । मैं इस पड़ोस में एक घंटे घूमा । इस पड़ोस के लोग स्पानी बोलते हैं , और मैं उसे समझ सका । मैं कुछ मैक्सिकन खाना खाकर एक ख़ाली बाज़ार देखकर सब्वेइ में एक बजे चढा । नमबर छह ट्रेन बारह मिनट बाद "ऐस्टर प्लेस" पहूँची । यह पड़ोस मुझे बहुत पसंद है । जब मैं न्यू योर्क में रहा , तब मैं उसके बहुत-से दिलचस्प रेस्तराओं में खाता था । उसकी दुकानें और लोग बहुत दिलचस्प भी हैं । मैं ट्रेन से निकलकर इस पड़ोस की सड़कों में पैदल चला । मैं मशहूर "हाउस्टन" सड़क को पार करके एक कैफ़े में रुका क्योंकी बहुत ठंड था । मुझे गरम चाय चाहिए थी । मैं वहाँ से छह बजे चलकर अपने पिताजी से सवा सात बजे चीनी पड़ोस में मिला । हमने बहुत बात की । मैं उससे नमस्कर कहकर ट्रेन से "ग्रेंड सेंट्रल" की तरफ़ गया । मैं टैंगो नहीं नाच पाया क्योंकि मैं उस समय तक थक जा चुका । मैं न्यू-हेवन-वाली ट्रेन में चढा नौ बजने में दस मिनट पर , और ट्रेन ने अपने दरवाज़े बंद किए नौ बजकर सात मिनट पर ।
Monday, February 16, 2009
खाना
पिछले सप्ताह मैंने बहुत-सारा खाना बनाए । मैंने कुछ मुर्गी की जांघें नींबू की चटनी में पकाईं । मुर्गी और नींबू साथ-साथ बहुत लज़ीज़ हैं । लेकिन मेरी मिठाइयाँ ज़्यादा लज़ीज़ हैं । मैंने बुधवार की टैंगो-क्लासों के लिए "मेरैंग" बनाए । "मेरैंग" बहुत हलकी मिठाइयाँ हैं । मेरे पास बहुत-सी सफेदी थी (मैंने पिछले रविवार केक के लिए बहुत अण्डपीत इसतेमाल किए) , तो मैंने यह इस ख़ास पुर्तगाली मिठाइयों के लिए इसतेमल किया । सब लोगों को ये चाहिए थे । और वैलेन्टाइन के दिन के लिए मैंने चार चाकलेट के "सूफ़्ले" बनाए । मेरा पहला प्रयास था । और मैंने "सूफ़्ले" कभी नहीं खाया था । मेरी सब दोस्तों को ये बहुत पसंद थे । ज़्यादा चाकलेट वैलेन्टाइन के दिन के लिए ! मैंने दो या तीन दर्जन चाकलेट की छोटे बिस्कुट बनाए । मैं बहुत मिठाइयाँ नहीं खाता हूँ , लेकिन मुझे ये बनाना बहुत पसंद है । मैं कालेज में जीव-रसायन पढ़ा , और मिठाइयाँ बनाना और जीव-रसायन दोनों काफ़ी समान हैं । इसके अलाबा मेरे दोसतों के साथ बाँटकर खाना मुझे पसंद है !
Wednesday, February 11, 2009
यहाँ नहीं
मैं दोस्तों के साथ शनिवार न्यु यार्क टैंगो नाचने गया। हम एक दुसरी दोस्त से मिले, और उसने हमको भयानक ख़बर बतायी । एक लड़की, टैंगो की नर्तकी भी है, शुक्रवार रात को मर गई । एक चालक ने उसको मार दिया ; चालक पिया हुआ था । मैं स्तबध था ; सिर्फ़ एक घंटा पहले मैं उसके बारे में सोच रहा था क्योंकि मैंने उसके साथ नाचना चाहा । मैंने हमारे पिछले नाच की याद की, उसकी मुस्कराहट, उसकी आवाज़, और उसका अस्तित्व । लेकिन अब वह हमेशा के लिए चला गई है , उसने हमको छोड़ा है । वह बहुत जवान है, सिर्फ़ २३ साल की है । वह इस हफ़्ते नया काम शुरू करनेवाली थी । मैं उसके बोइ-फ़रेंद को भी जानता हूँ ; वह उस दुर्घटना में तो था , और वह अस्पताल में है क्योंकि उसकी टाँग घायल है । अब तक किसीने उसको भयानक ख़बर बतायी होगी । वह ज़िनदा है , लेकिन लड़की के बिना ।
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